गोतीर्थ विद्यापीठ के संस्थापक श्री गोपाल भाई का संदेश

भारतीय संस्कृति में धरती, गौ और जननी को मां का स्थान दिया गया है।

भारतवर्ष सदैव से कृषि और कृषि प्रधान राष्ट्र रहा है, इस राष्ट्र की आर्थिक संरचना का केंद्र बिंदु गौ आधारित रहा है। हमारे मंत्र दृष्टा ऋषि ने गोमाता के महत्व को समझते हुए प्रत्येक मनुष्य के लिए गोपालन और गोसंरक्षण का सूत्र दिया है।

गो आधारित आर्थिक संरचना के बल पर यह भारत भूमि शस्य- श्यामला और धन-धान्य से परिपूर्ण रही ऐसी गौ आधारित आर्थिक संरचना के बल पर यह भारत राष्ट्र सोने की चिड़िया कहलाता था।

मेरे परम आदरणीय गुरु जी की कृपा से मुझे यह बात समझ में आ गई कि,

"जैसी गोमाता की स्थिति होती है वैसी हम सबकी एवं समग्र विश्व की परिस्थिति निर्माण होती है"।

गोमाता की सेवा करने का संकल्प किया और २००६ में बंसी गीर गौशाला की स्थापना की।

गोमाता की सेवा करते करते बहुत ही आनंद एवं प्रसन्नता का अनुभव होने लगा। गौ माता की कृपा हुई और मन में संकल्प हुआ कि, अपने परिवार के बच्चो को गोमाता के सानिध्य में भारतीय शिक्षा ही मिलनी चाहिए। गौ सेवा का महत्व जानने वाले ऋषि एवं आचार्यों ने विद्यापीठ में अध्ययन अध्यापन से पहले गौ सेवा को प्राधान्य दिया था।

मेरे परिवार के चार बच्चो से २०१३ में गुरुकल परंपरा से भारतीय शिक्षा का प्रारंभ किया।

इस विद्यापीठ का संचालन करने का दायित्व सोला भागवत विद्यापीठ में आचार्य की पदवी प्राप्त करने वाले श्री कल्पेश भाई जोशी एवं उनके धर्मपत्नी शर्वरी जोशी ने स्वीकार किया।

इस प्रकार की शिक्षा से बच्चों का समग्रलक्षी विकास होने लगा। समाज में भारतीय शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ने लगी और बहुत सारे अभिभावकों ने अपने बच्चों को गुरुकुल परंपरा से शिक्षा देना चाहा।

समाज के और भी बच्चों को इस परंपरा का लाभ मिले ऐसा सोचकर २०१६ मैं विद्यापीठ का बड़ा स्वरूप किया।

गोमाता के सानिध्य में होने के कारण और जहां गोमाता रहती है वह स्थान तीर्थ बन जाता है इस भाव से विद्यापीठ का नाम गोतीर्थ आदरणीय श्री इंदुमती बहन काटदरे जी ने रखा।।

अभी इस विद्यापीठ में ७० बच्चे अभ्यास कर रहे हैं और ५०० से भी ज्यादा बच्चे जुड़ना चाहते हैं।

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पता

बंसी गीर गोशाला
शान्तिपुरा चौकड़ी के पास
मेट्रो मोल की गली में,
सरखेज कर्णावती,अहमदाबाद,पिन:- ३८२२१०